16 February, 2010

A love letter which was not "submitted"! ;)

Well.. "submitting a love letter"? :D yeah! We had a "love letter writing competition" as a part of Literary event. I know, I am very bad at this, but still I somehow jotted this down.. It's not a "letter" traditionally.. well.. it's just a time pass!
(Note: This is something a guy might write to a girl)

सोच रहे है, की आज बता ही दे..
कुछ अजीब से बन चुके है हमारे हालात|
वैसे तो हर रोज ही मिलते है आपसे,
फिर भी लगता हैं, की कब होगी मुलाक़ात!

सोच रहे है, की आज बता ही दे..
की, आपको सोचे बिना, ढलता नहीं एक भी दिन|
खयालोंमे बसे आपके अल्फाज, आपकी मुस्कुराहट,
और आपकी नजर, हर रात चुरा लेते है नींद|

सोच रहे है, की आज बता ही दे..
फिर सोचते हैं, आप बुरा न मान ले कही|
लेकिन, आज कल याद नहीं आती आपकी,
आएगी कैसे? पहेले आपको भूले तो सही|

सोच रहे है, की आज बता ही दे..
की, अब ये बात हमसे छुपायी नहीं जाए!
दिल की धड़कन इतनी तेज है, की क्या कहें!
मगर क्या पता, आपने इनकार किया, तो रुक ही जाए!

सोच रहे है, की.....
चल बे.. ये थोडा ज्यादा ही senti हो गया..
क्या फ़ालतू में time waste..
जल्दी बता, हां या ना? जो भी है.. तेरी मर्जी..
पर अपुन तो है ऐसेइच.. बादमे complaint नहीं चलेगी..

If anyone has really read it and come till this point, hats off! ;) :D and sorry for boring so much! :D
(Image taken from here.)

3 comments:

Aaditya M. Joshi said...

why did u not submit it?!

गिरिजा said...

is it "submittable" ;)
no actually.. i was too bust that weekend.. decorate vagaire karayche hote na? wel nai zala.. moreovee that last stanza is still not perfect (as per me)

RUPALI said...

hey girija, kharach far bhari lihilay...
and it's really, useful one!