जब किसीके तरफ दिल झुकने लगे..
बात आकर जुबाँ तक रुकने लगे..
आंखोआंखोमें इकरार होने लगे..
बोल दो अगर तुम्हे प्यार होने लगे..
चाहने जब लगे दिल किसीकी खुशी..
दिल्लगी ये नहीं ये है दिलकी लगी..
आँधियोंको दबाने से क्या फ़ायदा..
प्यार दिलमे छुपानेसे क्या फायदा..
जान से प्यारा जब दिलदार होने लगे..
उसकी खुशबू अगर अपनी सांसोमे हो..
उसका सपना अगर अपनी आंखोमे हो..
जब न दिलके बेहेलनेकी सूरत लगे..
जब कोई जिन्दगी की जरुरत लगे..
और जीना भी दुशवार होने लगे..
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जब audits की तरफ दिल झुकने लगे..
maths आकर जुबाँ तक रुकने लगे..
abstract level पे इकरार होने लगे..
बोल दो अगर ML से प्यार होने लगे..
सोचने जब लगे दिल बस्स formulation
easy नहीं है, ये लेकिन कर लो approximation
constraints को, हटाने से क्या फायदा?
primal-dual convert करनेसे क्या फायदा?
num constraints जब exponential होने लगे..
बोल दो अगर ML से प्यार होने लगे..
बस्स जरासी probability आती जो हो..
algorithms भी design कर ही लेते हो..
जब न दिलके बेहेलनेकी सूरत लगे..
जब ML जिंदगीकी जरुरत लगे..
कुछ और करना भी दुशवार होने लगे..
बोल दो अगर ML से प्यार होने लगे..
प्यार तो होना ही था.. :D
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These days I seriously feel what is written in the bold face - what if I stop working in this area? :( What will happen to me if I don't read any research paper in this area or don't see any SVM formulation or don't look at any approximations for NP-Hard problems or don't see how the features are designed or don't see how Active learning is performed?? :( :(
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